पीरियड्स Late Kyu Aate Hai? सच्चाई जानो और बेफिक्र रहो

कभी ऐसा हुआ है कि पीरियड्स का टाइम निकल गया और आप घबरा गईं?
दिल में अचानक कई सवाल आने लगे — “सब ठीक तो है?” “कहीं प्रेग्नेंसी तो नहीं?” “इतनी देर क्यों हो गई?”

अगर ऐसा हुआ है तो आप अकेली नहीं हो।

लगभग हर लड़की या महिला को अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी लेट पीरियड्स का अनुभव होता है।
लेकिन अच्छी बात यह है कि हर बार देरी का मतलब बीमारी नहीं होता। कई बार शरीर बस हमें यह बताता है कि उसे थोड़ा आराम चाहिए, थोड़ा संतुलन चाहिए।

कभी ऐसा हुआ है कि पीरियड्स का टाइम निकल गया और आप घबरा गईं? दिल में अचानक कई सवाल आने लगे — “सब ठीक तो है?” “कहीं प्रेग्नेंसी तो नहीं?” “इतनी देर क्यों हो गई?”

अब चलिए समझते हैं पीरियड्स लेट क्यों आते हैं और कब डॉक्टर से बात करना जरूरी हो सकता है।

Period ka cycle आखिर होता क्या है?

सबसे पहले यह समझ लेते हैं कि normal menstrual cycle क्या होता है।

ज़्यादातर महिलाओं में:

  • cycle 21 से 35 दिनों के बीच रहता है

  • bleeding आमतौर पर 3 से 7 दिन तक होती है

अगर पीरियड्स 35 दिन से भी ज्यादा देर से आएं, तो हम उसे late period कहते हैं।

लेकिन यहाँ एक बात याद रखें:

हर लड़की का शरीर अलग होता है
इसलिए cycle भी सबका एक जैसा नहीं होता

इसीलिए देर होने पर तुरंत डरने की जगह हमें समझना चाहिए कि शरीर signal क्यों दे रहा है।

1. Stress – सबसे common और सबसे अनदेखा कारण

आज की लाइफ़ में mental तनाव बहुत आम हो गया है।
पढ़ाई का प्रेशर, घर की जिम्मेदारियाँ, काम, रिश्ते, future की चिंता — ये सब मिलकर दिमाग पर असर डालते हैं।

जब हम लगातार stress में रहते हैं, दिमाग से निकलने वाले hormones गड़बड़ा जाते हैं।
इसी कारण से:

  • ओवुलेशन लेट हो जाता है

  • पीरियड्स का टाइमिंग बदल जाता है

इसलिए अगर हाल ही में life में कोई बड़ा बदलाव हुआ है, जैसे:

  • exam

  • job change

  • breakup

  • family tension

तो देर होना normal हो सकता है।

इसलिए खुद को थोड़ा आराम दो
अपने लिए समय निकालो
नींद पूरी करो

अक्सर cycle खुद ही ठीक होने लगता है।

2. Weight gain या weight loss – शरीर balance चाहता है

शरीर हमेशा balance के साथ काम करता है।
बहुत जल्दी वजन बढ़ जाए या अचानक बहुत कम हो जाए तो hormones असंतुलित हो जाते हैं।

Weight बढ़ने से:

  • insulin resistance बढ़ सकता है

  • ovaries ज़्यादा male hormones बनाना शुरू कर देती हैं

और इससे periods late होने लगते हैं।

इसी तरह crash dieting, बहुत कम खाना या अचानक intense workout भी cycle बिगाड़ देता है।

बेहतर यही है कि:

  • धीरे धीरे वजन control करें

  • fad diet से बचें

  • balanced खाना खाएँ

  • regular walk या exercise करें

शरीर को समय दें। वह खुद adjust करना सीखता है।

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3. PCOS / PCOD – आजकल बहुत common

कई महिलाओं में late periods का कारण PCOS / PCOD भी होता है।

इसमें:

  • ovaries में छोटे cysts बन सकते हैं

  • hormones असंतुलित हो जाते हैं

  • ovulation regular नहीं रहता

इसके कारण:

  • periods देर से आते हैं

  • कभी बिल्कुल मिस भी हो जाते हैं

साथ ही हो सकते हैं:

  • मुंहासे

  • चेहरे पर अनचाहे बाल

  • वजन बढ़ना

अगर लक्षण बार-बार दिख रहे हों, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है।
लाइफ़स्टाइल बदलाव, diet और सही treatment से यह condition काफी हद तक control हो सकती है।

4. Pregnancy – हमेशा संभव विकल्प

अगर sexually active हो, तो लेट period का मतलब pregnancy भी हो सकता है।
भले ही आपने precautions का इस्तेमाल किया हो, chance फिर भी रह जाता है।

इसलिए:

अगर पीरियड्स 7–10 दिन late हो जाएँ
और nausea, weakness या breast tenderness जैसी feelings हों

तो घर पर pregnancy test करना अच्छा रहेगा।

Clear result के लिए सुबह का first urine sample इस्तेमाल करें।

अगर doubt रहे तो doctor से consult करें।

5. Thyroid issues – छोटा gland, बड़ा असर

थायराइड शरीर की कई processes को control करता है।
जब यह कम या ज्यादा काम करता है, तो menstrual cycle पर भी असर डाल देता है।

Symptoms हो सकते हैं:

  • बहुत ज्यादा थकान

  • बाल गिरना

  • वजन अचानक बढ़ना या घटना

  • ठंड या गर्मी ज़्यादा लगना

अगर पीरियड्स लगातार irregular हों, तो थायराइड टेस्ट करवाना समझदारी है।
इसे दवाइयों से control किया जा सकता है।

6. Birth control pills या दवाइयों का असर

कभी कभी contraceptive pills, emergency pills या कुछ medicines से भी periods लेट हो जाते हैं।

क्योंकि ये pills hormones को temporarily बदल देती हैं।
जब body वापस normal rhythm पकड़ती है, तब cycle फिर regular हो जाता है।

लेकिन अगर emergency pills बार-बार लेनी पड़ रही हों, तो doctor से सलाह जरूर लें।
बार-बार इस्तेमाल करना सही नहीं होता।

7. Lifestyle – नींद, junk food और habits

आजकल:

  • देर रात तक मोबाइल

  • junk food

  • no exercise

  • irregular sleep

ये सब मिलकर periods पर असर डालते हैं।

Hormones को भी routine चाहिए।
जब routine टूट जाता है, cycle भी delay करने लगता है।

इसलिए:

time पर सोना
time पर खाना
daily movement

यह सब simple steps बहुत फर्क डालते हैं।

कब doctor से मिलना जरूरी है?

हर late period serious नहीं होता।
लेकिन इन situations में doctor से बात करना अच्छा है:

  • लगातार 2–3 महीने periods miss हों

  • बहुत ज्यादा दर्द

  • बहुत heavy bleeding

  • अचानक बहुत ज्यादा वजन बढ़ना

  • pregnancy का शक होना

Doctor reason समझकर सही टेस्ट और treatment बताएगा।

खुद दवा लेना सही नहीं है।

क्या late periods हमेशा dangerous होते हैं?

नहीं।

बहुत बार यह body का normal reaction होता है।
पर warning signs ignore भी नहीं करने चाहिए।

सबसे जरूरी बात:

खुद को blame न करो
panic न करो
शरीर की सुनो

धीरे धीरे lifestyle सुधारो और जरूरत पड़ने पर doctor से बात करो।
यही सबसे safe तरीका है।

अंतिम बात — अपने शरीर से दोस्ती करो

पीरियड्स सिर्फ bleeding नहीं होते।
ये हमारे शरीर का monthly report card होते हैं।

जब periods late होते हैं, तो शरीर कहता है:

“मुझे थोड़ा ध्यान दो। मुझे आराम चाहिए। मुझे balance चाहिए।”

अगर हम signals को समझना सीख जाएँ, तो health automatically बेहतर हो जाती है।

Disclaimer

यह article सिर्फ awareness के लिए है।
अगर आपके periods लगातार irregular हों या आपको कोई doubt हो, तो gynecologist से सलाह लेना हमेशा बेहतर है।

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