हर महीने वही बेचैनी।
कैलेंडर पर तारीखें कटती जाती हैं, शरीर में कोई हलचल नहीं होती और मन में सवाल गूंजता रहता है
क्या इस बार भी पीरियड नहीं आएगा
फोन पर सहेलियाँ कहती हैं टेंशन मत लो
घर वाले कहते हैं शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा
और डॉक्टर की दवा खाते हुए भी मन में डर बना रहता है
अगर आप पीसीओडी से जूझ रही हैं और आपका पीरियड बार बार लेट होता है, कभी आता है कभी महीनों गायब रहता है, तो यकीन मानिए आपकी परेशानी बिल्कुल वास्तविक है। यह कोई छोटी समस्या नहीं है और न ही आपकी गलती।
इस लेख में हम बिल्कुल साफ और सरल भाषा में समझेंगे कि पीसीओडी में पीरियड लेट क्यों होते हैं, इसके असली कारण क्या हैं और सबसे ज़रूरी बात यह कि इसे सही तरीके से कैसे संभाला जाए।

पीसीओडी क्या है और इसका पीरियड से क्या संबंध है
पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी डिज़ीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिला के अंडाशय सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते। अंडाशय में छोटे छोटे सिस्ट बनने लगते हैं और हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है।
पीरियड एक हार्मोन आधारित प्रक्रिया है। जब हार्मोन सही समय पर सही मात्रा में काम करते हैं, तभी हर महीने नियमित पीरियड आता है। पीसीओडी में यही संतुलन बिगड़ जाता है और यहीं से पीरियड लेट होने की शुरुआत होती है।
हार्मोनल असंतुलन पीसीओडी में पीरियड लेट होने का सबसे बड़ा कारण
पीसीओडी में शरीर में पुरुष हार्मोन जिसे एंड्रोजन कहा जाता है, उसकी मात्रा बढ़ जाती है। इसके साथ ही महिला हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाता है।
जब ये हार्मोन सही तालमेल में नहीं होते, तो दिमाग और अंडाशय के बीच का संदेश ठीक से नहीं पहुंच पाता। नतीजा यह होता है कि शरीर को यह संकेत ही नहीं मिल पाता कि पीरियड शुरू करना है। इसी कारण पीरियड कभी बहुत लेट आता है और कभी बिल्कुल नहीं आता।
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ओव्यूलेशन न होना पीरियड को रोक देता है
सामान्य स्थिति में हर महीने अंडाशय से एक अंडा निकलता है जिसे ओव्यूलेशन कहते हैं। ओव्यूलेशन के बाद ही पीरियड की प्रक्रिया पूरी होती है।
पीसीओडी में अक्सर ओव्यूलेशन होता ही नहीं या अधूरा रह जाता है। जब अंडा नहीं बनता, तो शरीर पीरियड शुरू करने की जरूरत ही महसूस नहीं करता। यही वजह है कि पीसीओडी में कई महिलाओं को महीनों तक पीरियड नहीं आता।
वजन का असंतुलन पीरियड साइकिल बिगाड़ देता है
पीसीओडी और वजन का गहरा संबंध है। बहुत ज्यादा वजन होने पर शरीर में इंसुलिन सही तरह से काम नहीं करता और हार्मोन और ज्यादा बिगड़ जाते हैं। वहीं बहुत तेजी से वजन कम करने पर शरीर को अचानक झटका लगता है।
दोनों ही स्थितियों में शरीर खुद को सुरक्षित मोड में डाल लेता है और सबसे पहले पीरियड जैसी प्रक्रियाओं को रोक देता है। इसलिए पीसीओडी में वजन का संतुलन बहुत जरूरी होता है।
इंसुलिन रेसिस्टेंस पीरियड देरी की जड़ है
पीसीओडी में कई महिलाओं को इंसुलिन रेसिस्टेंस हो जाता है। इसका मतलब है कि शरीर में इंसुलिन तो बनता है लेकिन ठीक से काम नहीं करता।
इस स्थिति में शरीर ज्यादा एंड्रोजन बनाने लगता है जो सीधे ओव्यूलेशन को रोकता है। जब ओव्यूलेशन रुकता है तो पीरियड अपने आप लेट हो जाता है। कई बार यही समस्या आगे चलकर डायबिटीज का कारण भी बन सकती है।
मानसिक तनाव और नींद की कमी पीसीओडी को और बिगाड़ देती है
लगातार चिंता करना, देर रात तक जागना, मोबाइल या स्क्रीन पर समय बिताना ये सब चीजें हार्मोन को बहुत प्रभावित करती हैं। पीसीओडी में पहले से ही हार्मोन असंतुलन होता है और तनाव उसे और ज्यादा बिगाड़ देता है।
जब दिमाग तनाव में होता है, तो शरीर प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता नहीं देता। इसका सीधा असर पीरियड पर पड़ता है और वह लेट होने लगता है।
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थायरॉइड या दूसरी हार्मोनल समस्याएँ भी कारण बन सकती हैं
कई महिलाओं में पीसीओडी के साथ थायरॉइड की समस्या भी पाई जाती है। जब शरीर एक से ज्यादा हार्मोनल समस्याओं से जूझ रहा होता है, तो पीरियड का नियमित रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।
ऐसी स्थिति में सिर्फ पीसीओडी का इलाज काफी नहीं होता, बल्कि पूरी हार्मोनल स्थिति को समझना जरूरी होता है।
खराब लाइफस्टाइल पीसीओडी को कंट्रोल से बाहर कर देती है
लगातार जंक फूड खाना, मीठी चीजों का ज्यादा सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित दिनचर्या पीसीओडी को और गंभीर बना देती है।
धीरे धीरे शरीर उस स्थिति में पहुंच जाता है जहां पीरियड पूरी तरह अनियमित हो जाता है। कई महिलाओं को यही लगता है कि दवा काम नहीं कर रही, जबकि असल समस्या लाइफस्टाइल में होती है।
पीसीओडी में पीरियड कितना लेट होना सामान्य माना जाता है
पीसीओडी में 35 से 45 दिन का पीरियड साइकिल आम बात मानी जाती है। लेकिन अगर दो महीने तक पीरियड नहीं आता या बार बार तीन महीने तक रुक जाता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यह शरीर का संकेत होता है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है
अगर पीरियड लगातार दो से तीन महीने तक नहीं आया है, बहुत ज्यादा दर्द या असामान्य ब्लीडिंग होती है, या आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
समय पर सलाह लेने से आगे की बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
पीसीओडी में पीरियड लेट हो तो सही समाधान क्या है
पीसीओडी में सबसे पहले लाइफस्टाइल सुधारना जरूरी होता है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, नियमित नींद और संतुलित खानपान हार्मोन को धीरे धीरे सही दिशा में लाने लगते हैं।
शुगर और जंक फूड कम करना, प्रोटीन और फाइबर बढ़ाना और मानसिक तनाव कम करना पीरियड को प्राकृतिक रूप से नियमित करने में मदद करता है।
दवा की जरूरत तभी होती है जब डॉक्टर जांच के बाद सलाह दें। बिना सलाह के दवा लेना समस्या को और बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
पीसीओडी में पीरियड लेट होना डराने वाला जरूर लगता है, लेकिन यह ऐसी समस्या नहीं है जिसे संभाला न जा सके। सही जानकारी, धैर्य और जीवनशैली में छोटे छोटे बदलाव इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
अपने शरीर को समय दें, खुद को दोष न दें और जरूरत पड़ने पर सही सलाह लेने से पीछे न हटें। सुधार धीरे आता है, लेकिन आता जरूर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीसीओडी में Period लेट होना क्या सामान्य है?
पीसीओडी में 35 से 45 दिन तक Period लेट होना आम बात मानी जाती है। लेकिन अगर दो से तीन महीने तक Period नहीं आता है, तो इसे सामान्य नहीं माना जाता और Doctor से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
क्या PCOD में बिना दवा के Period आ सकता है?
हाँ, कई मामलों में सही Lifestyle, संतुलित diet, नियमित exercise और stress control से PCOD में Period बिना दवा के भी आ सकता है। लेकिन हर शरीर अलग होता है, इसलिए result व्यक्ति पर निर्भर करता है।
PCOD में Period late होने से pregnancy पर असर पड़ता है क्या?
अगर PCOD में लंबे समय तक Period irregular रहता है, तो ovulation प्रभावित हो सकता है, जिससे pregnancy में दिक्कत आ सकती है। सही treatment और Doctor की guidance से pregnancy संभव होती है।
PCOD में Period कितने महीने तक नहीं आए तो चिंता करनी चाहिए?
अगर Period लगातार दो महीने तक नहीं आया है, तो यह warning sign हो सकता है। तीन महीने या उससे ज्यादा समय तक Period न आने पर medical जांच करवाना जरूरी होता है।
क्या शादी के बाद PCOD अपने आप ठीक हो जाता है?
नहीं, शादी के बाद PCOD अपने आप ठीक नहीं होता। PCOD एक hormonal condition है, जिसे सही Lifestyle, diet और जरूरत पड़ने पर Doctor की treatment से ही control किया जा सकता है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी इलाज या दवा को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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