महिलाओं में बार-बार कमर दर्द होना किस बीमारी का संकेत हो सकता है

कमर दर्द आजकल बहुत सामान्य समस्या बन चुका है। कई महिलाएं इसे दिनभर के काम का असर समझकर अनदेखा कर देती हैं। घर के काम, ऑफिस की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और लगातार भागदौड़ के कारण कमर में दर्द होना स्वाभाविक लगता है। लेकिन जब यह दर्द बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बना रहे या बिना कारण बढ़ता जाए, तब इसे सामान्य मानना सही नहीं होता।

शरीर कभी बिना वजह दर्द नहीं देता। दर्द शरीर की भाषा है। वह हमें बताता है कि कहीं न कहीं कोई असंतुलन या समस्या पैदा हो रही है। इसलिए बार-बार कमर दर्द को केवल थकान समझकर दबा देना भविष्य में बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि महिलाओं में लगातार कमर दर्द किन बीमारियों का संकेत हो सकता है, किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है।

महिलाओं में बार-बार कमर दर्द

मांसपेशियों की कमजोरी और गलत जीवनशैली

सबसे सामान्य कारण है मांसपेशियों की कमजोरी। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है। कई महिलाएं घंटों कंप्यूटर के सामने बैठती हैं या मोबाइल पर झुकी रहती हैं। इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है और कमर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो शरीर का भार सही तरीके से संतुलित नहीं हो पाता। इससे हल्का दर्द शुरू होता है जो धीरे-धीरे बार-बार होने लगता है।

कम शारीरिक गतिविधि, व्यायाम की कमी और गलत बैठने की आदतें इस समस्या को और बढ़ा देती हैं।

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विटामिन D और कैल्शियम की कमी

महिलाओं में कमर दर्द का एक बड़ा कारण हड्डियों की कमजोरी भी हो सकता है। विटामिन D और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी होते हैं।

यदि शरीर में इनकी कमी हो जाए, तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। शुरुआत में हल्का दर्द महसूस होता है, खासकर कमर और पैरों में। समय के साथ यह दर्द लगातार बना रह सकता है।

धूप में कम समय बिताना, दूध या कैल्शियम युक्त भोजन कम लेना और हार्मोनल बदलाव इस कमी को बढ़ा सकते हैं।

स्लिप डिस्क या रीढ़ की समस्या

यदि कमर दर्द बहुत तेज हो, झुकने पर बढ़े या पैरों तक फैल जाए, तो यह रीढ़ की समस्या का संकेत हो सकता है।

रीढ़ की हड्डियों के बीच डिस्क होती है जो झटकों को सहने में मदद करती है। जब यह डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो नसों पर दबाव पड़ता है। इससे कमर दर्द के साथ पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी भी हो सकती है।

यह स्थिति नजरअंदाज करने पर गंभीर हो सकती है।

किडनी से जुड़ी समस्या

कई बार कमर दर्द का संबंध हड्डियों से नहीं बल्कि किडनी से होता है।

यदि कमर के एक तरफ गहरा दर्द हो, साथ में पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना या बुखार हो, तो यह किडनी संक्रमण या पथरी का संकेत हो सकता है।

ऐसे दर्द को सामान्य कमर दर्द समझकर टालना खतरनाक हो सकता है।

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और पीरियड्स से जुड़ा दर्द

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी कमर दर्द का कारण बन सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान कई महिलाओं को कमर में दर्द होता है। यह सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि हर महीने बहुत तेज दर्द हो, तो यह एंडोमेट्रियोसिस या अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

पीसीओडी में भी वजन बढ़ने और हार्मोनल असंतुलन के कारण कमर दर्द हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान और बाद में कमर दर्द

गर्भावस्था के दौरान शरीर का वजन और गुरुत्वाकर्षण का केंद्र बदल जाता है। इससे कमर पर दबाव बढ़ता है और दर्द महसूस हो सकता है।

डिलीवरी के बाद भी मांसपेशियों की कमजोरी और बच्चे को उठाने जैसी गतिविधियों के कारण दर्द बना रह सकता है।

मोटापा और कमर दर्द का संबंध

अधिक वजन सीधे रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालता है। खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से शरीर का संतुलन बदल जाता है। इससे कमर पर अतिरिक्त भार पड़ता है और दर्द होने लगता है।

यदि वजन लगातार बढ़ रहा है और साथ में कमर दर्द भी है, तो वजन नियंत्रण जरूरी हो जाता है।

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मानसिक तनाव भी हो सकता है कारण

बहुत कम लोग जानते हैं कि तनाव भी शरीर में दर्द पैदा कर सकता है। लगातार मानसिक दबाव रहने पर मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और कमर में जकड़न महसूस हो सकती है।

तनाव से नींद खराब होती है, जिससे शरीर की मरम्मत प्रक्रिया प्रभावित होती है और दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

यदि कमर दर्द के साथ ये लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए

दर्द लगातार कई हफ्तों तक रहे
दर्द पैरों तक फैलने लगे
सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो
बुखार या पेशाब में समस्या हो
अचानक वजन कम हो

ये संकेत गंभीर बीमारी का इशारा हो सकते हैं।

कमर दर्द से बचने के लिए क्या करें

रोजाना हल्का व्यायाम करें ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें।
लंबे समय तक बैठने से बचें और हर एक घंटे में थोड़ा चलें।
सही मुद्रा में बैठें और झुककर मोबाइल देखने की आदत कम करें।
कैल्शियम और विटामिन D युक्त भोजन लें।
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें।
पर्याप्त नींद लें।

अंतिम संदेश

कमर दर्द को केवल थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। शरीर बार-बार दर्द देकर संकेत दे रहा होता है कि कहीं कुछ गलत हो रहा है।

समय पर कारण पहचानकर इलाज किया जाए तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।

अपने शरीर की आवाज सुनना सीखिए क्योंकि वही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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