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भूमिका
“मैं कुछ भी खाऊँ या न खाऊँ, वजन कम ही नहीं होता।”
अगर आप PCOS से जूझ रही हैं, तो ये वाक्य शायद आपने खुद से सैकड़ों बार कहा होगा। हर नई डाइट, हर नया वर्कआउट प्लान, हर सलाह—सब कुछ आज़माने के बाद भी जब तराजू का कांटा वहीं अटका रहे, तो थकान सिर्फ शरीर में नहीं, मन में भी भर जाती है। धीरे-धीरे खुद पर शक होने लगता है। क्या मुझमें ही कमी है? क्या मैं पर्याप्त कोशिश नहीं कर रही?
सच यह है कि PCOS में वजन न कम होना आपकी गलती नहीं है। यह एक जटिल हार्मोनल स्थिति है, जिसमें शरीर का सिस्टम वही नियम नहीं मानता जो आम तौर पर बताए जाते हैं। PCOS में वजन घटाने का संघर्ष इसलिए कठिन होता है क्योंकि समस्या सतह पर नहीं, अंदर गहराई में होती है। इस लेख में हम उसी गहराई में उतरेंगे। बिना जटिल भाषा के, बिना डराए, बिल्कुल इंसानी अंदाज़ में—ताकि आप समझ सकें कि असली वजह क्या है और आप अपने शरीर के साथ लड़ने के बजाय उसे समझकर आगे कैसे बढ़ सकती हैं।
PCOS क्या है और यह शरीर के साथ क्या करता है
PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम। यह सिर्फ ओवरी की बीमारी नहीं है, बल्कि पूरे हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थिति है। इसमें शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। खासकर इंसुलिन और एंड्रोजन नाम के हार्मोन का। यही असंतुलन वजन बढ़ने और वजन न घट पाने की जड़ बनता है।
PCOS में शरीर ऊर्जा को अलग तरह से संभालता है। जहाँ सामान्य शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलकर इस्तेमाल कर लेता है, वहीं PCOS वाला शरीर उसे फैट के रूप में जमा करने लगता है। खासकर पेट और कमर के आसपास। यही कारण है कि कई महिलाएँ कहती हैं कि वजन पूरे शरीर में नहीं, सिर्फ पेट में बढ़ता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस: सबसे बड़ी लेकिन अनदेखी वजह
PCOS में वजन न घटने की सबसे बड़ी वजह इंसुलिन रेजिस्टेंस है। इसे समझना बेहद ज़रूरी है। इंसुलिन एक हार्मोन है जो खाने के बाद शुगर को कोशिकाओं तक पहुँचाता है ताकि शरीर उसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल कर सके। लेकिन PCOS में कोशिकाएँ इंसुलिन की बात नहीं मानतीं। नतीजा यह होता है कि शरीर और ज्यादा इंसुलिन बनाता है।
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यह अतिरिक्त इंसुलिन शरीर को फैट स्टोर करने का संकेत देता है। चाहे आप कम खाएँ, चाहे हेल्दी खाएँ, शरीर फिर भी फैट पकड़कर बैठा रहता है। यही वजह है कि PCOS में कैलोरी गिनना या सिर्फ कम खाना अक्सर काम नहीं करता। समस्या खाने की मात्रा नहीं, बल्कि शरीर की प्रतिक्रिया होती है।
हार्मोनल असंतुलन और वजन का सीधा रिश्ता
PCOS में एंड्रोजन हार्मोन, जिसे आम भाषा में मेल हार्मोन कहा जाता है, सामान्य से ज्यादा हो सकता है। यह हार्मोन मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है। मेटाबॉलिज़्म धीमा होने का मतलब है कि शरीर कम कैलोरी जलाता है और ज्यादा स्टोर करता है।
इसके साथ ही एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का असंतुलन भी होता है। ये हार्मोन सिर्फ पीरियड्स से जुड़े नहीं हैं, बल्कि फैट स्टोरेज और भूख को भी नियंत्रित करते हैं। जब ये संतुलन में नहीं होते, तो शरीर को यह समझ ही नहीं आता कि कब खाना है, कब रुकना है और कब फैट जलाना है।
PCOS में डाइट क्यों अक्सर फेल हो जाती है
बहुत सी महिलाएँ शिकायत करती हैं कि उन्होंने सब कुछ सही किया, फिर भी नतीजा नहीं मिला। दरअसल, ज्यादातर डाइट प्लान PCOS को ध्यान में रखकर नहीं बनाए जाते। वे सामान्य शरीर के लिए होते हैं।
PCOS में अगर आप बहुत कम कैलोरी खाने लगती हैं, तो शरीर इसे खतरे के रूप में देखता है। वह फैट जलाने के बजाय उसे बचाने लगता है। इसके अलावा बार-बार भूखा रहना कोर्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाता है, जो वजन घटाने में और बाधा बनता है।
PCOS में डाइट फेल इसलिए होती है क्योंकि समस्या सिर्फ खाने से नहीं, हार्मोनल प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है।
एक्सरसाइज़ करने के बाद भी वजन क्यों नहीं घटता
यह सबसे ज्यादा निराश करने वाला हिस्सा होता है। घंटों वर्कआउट करने के बाद भी जब फर्क न दिखे, तो मन टूट जाता है। PCOS में ज्यादा हार्ड कार्डियो कई बार उल्टा असर करता है। बहुत ज्यादा दौड़ना, बहुत ज्यादा हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज़ शरीर को स्ट्रेस में डाल देती है।
स्ट्रेस बढ़ते ही कोर्टिसोल बढ़ता है और कोर्टिसोल पेट की चर्बी को पकड़कर रखने में माहिर होता है। इसलिए PCOS में वही एक्सरसाइज़ फायदेमंद होती है जो शरीर को शांत रखते हुए मसल्स को मजबूत करे। वजन घटाने का रास्ता यहाँ जोर लगाने से नहीं, समझदारी से चलता है।
नींद की कमी और उसका असर
PCOS में नींद की समस्या आम है। देर तक नींद न आना, बार-बार नींद टूटना या सुबह थकान के साथ उठना। नींद की कमी सीधे-सीधे हार्मोन बिगाड़ती है। इससे भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो जाता है और पेट भरा होने का संकेत देने वाला हार्मोन कमजोर पड़ जाता है।
नतीजा यह होता है कि बिना भूख के भी खाने का मन करता है और वजन कम होना और मुश्किल हो जाता है। नींद को हल्के में लेना PCOS में बहुत महँगा पड़ सकता है।
मानसिक तनाव और भावनात्मक थकान
PCOS सिर्फ शरीर की नहीं, दिमाग की भी परीक्षा लेता है। बार-बार फेल होती कोशिशें आत्मविश्वास तोड़ देती हैं। तनाव बढ़ता है, और तनाव वजन घटाने का दुश्मन है। जब दिमाग थका होता है, तो शरीर भी थका रहता है।
भावनात्मक रूप से असंतुलित रहने पर कई महिलाएँ या तो बहुत कम खाने लगती हैं या भावनाओं में बहकर ज्यादा। दोनों ही स्थितियाँ वजन घटाने में रुकावट बनती हैं।
पीरियड्स का अनियमित होना और वजन
PCOS में पीरियड्स का अनियमित होना आम है। यह सिर्फ एक लक्षण नहीं, बल्कि संकेत है कि हार्मोनल सिस्टम संतुलन में नहीं है। जब ओव्यूलेशन ठीक से नहीं होता, तो प्रोजेस्टेरोन कम बनता है, जो शरीर को फैट जलाने में मदद करता है।
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इस असंतुलन का सीधा असर वजन पर पड़ता है। जब तक पीरियड्स और ओव्यूलेशन बेहतर नहीं होते, वजन घटाना चुनौती बना रहता है।
PCOS में वजन घटाने का सही नजरिया
PCOS में वजन घटाने का मतलब तेजी से पतला होना नहीं है। इसका मतलब है शरीर के अंदर की गड़बड़ी को धीरे-धीरे ठीक करना। यहाँ लक्ष्य सिर्फ किलो कम करना नहीं, बल्कि हार्मोन को संतुलन में लाना होना चाहिए।
जब हार्मोन सुधरते हैं, तो वजन अपने आप प्रतिक्रिया देने लगता है। इसमें समय लगता है, लेकिन यह टिकाऊ होता है।
छोटे बदलाव जो बड़ा फर्क ला सकते हैं
PCOS में चमत्कारिक उपाय नहीं होते, लेकिन छोटे-छोटे बदलाव मिलकर बड़ा असर करते हैं। खाने के बीच बहुत लंबा गैप न रखना, प्रोटीन और फाइबर को प्राथमिकता देना, शुगर और रिफाइंड कार्ब्स को सीमित करना—ये सब शरीर को सुरक्षित महसूस कराते हैं।
जब शरीर को सुरक्षा का एहसास होता है, तो वह फैट छोड़ने लगता है। यही असली खेल है।
खुद को दोष देना बंद करना क्यों जरूरी है
सबसे जरूरी बात यह है कि आप खुद को दोष देना बंद करें। PCOS आलस्य नहीं है। यह इच्छाशक्ति की कमी नहीं है। यह एक मेडिकल स्थिति है, जिसे समझ और धैर्य की जरूरत होती है।
जब आप खुद से लड़ना छोड़कर खुद के साथ काम करना शुरू करती हैं, तभी बदलाव शुरू होता है।
उम्मीद की बात
PCOS के साथ भी वजन कम किया जा सकता है। हजारों महिलाएँ कर चुकी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने पुराने नियमों को छोड़कर अपने शरीर की भाषा समझी। उन्होंने जल्दी नतीजों की जगह स्थायी बदलाव चुने।
अगर आज आपका वजन कम नहीं हो रहा, तो इसका मतलब यह नहीं कि कभी नहीं होगा। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आपको अपने शरीर के लिए सही रास्ता अभी मिलना बाकी है।
निष्कर्ष
“PCOS में वजन कम क्यों नहीं होता?” इस सवाल का जवाब किसी एक कारण में नहीं छिपा है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल असंतुलन, तनाव, नींद और भावनात्मक थकान—सबका मिला-जुला असर है।
जब आप इसे समझ लेती हैं, तो सफर आसान हो जाता है। धीरे-धीरे, प्यार और धैर्य के साथ। याद रखिए, आपका शरीर आपका दुश्मन नहीं है। वह बस मदद के लिए सही संकेतों का इंतज़ार कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन की वजह से शरीर फैट को आसानी से स्टोर करता है और उसे जलाने में धीमा हो जाता है, इसलिए वजन कम करना कठिन हो जाता है।
नहीं। बहुत कम खाने से शरीर स्ट्रेस में चला जाता है और फैट को बचाने लगता है, जिससे वजन घटने के बजाय और रुक सकता है।
ऐसी डाइट जिसमें प्रोटीन, फाइबर और लो-ग्लाइसेमिक फूड शामिल हों, PCOS में हार्मोन बैलेंस करने और वजन घटाने में मदद करती है।
नहीं। बहुत ज्यादा हार्ड एक्सरसाइज़ से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हल्की-मध्यम एक्टिविटी ज्यादा फायदेमंद होती है।
इंसुलिन और कोर्टिसोल हार्मोन के असंतुलन के कारण शरीर पेट के आसपास फैट जमा करने लगता है।
हाँ। नींद पूरी न होने से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे वजन घटाना मुश्किल हो जाता है।
यह हर महिला में अलग-अलग होता है। आमतौर पर हार्मोन बैलेंस होने के बाद धीरे-धीरे वजन में बदलाव दिखने लगता है।
PCOS का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही लाइफस्टाइल और देखभाल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
हाँ। ज्यादा तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो फैट स्टोरेज को बढ़ावा देता है।
सबसे जरूरी है धैर्य रखना, खुद को दोष न देना और शरीर के हार्मोन को संतुलन में लाने पर ध्यान देना।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, दवा, डाइट या इलाज को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।