अक्सर महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे छोटे दर्द को सामान्य समझकर अनदेखा कर देती हैं। कभी थकान का असर मान लिया जाता है, कभी उम्र का और कभी काम की अधिकता का। लेकिन कई बार शरीर के अलग अलग हिस्सों में बार बार होने वाला दर्द किसी गहरी समस्या का संकेत हो सकता है। इन संकेतों में से एक है शरीर में बढ़ती सूजन।
सूजन केवल बाहर दिखाई देने वाली फुलावट नहीं होती। कई बार यह शरीर के भीतर चुपचाप बढ़ती रहती है और अलग अलग प्रकार के दर्द के रूप में सामने आती है। यदि समय रहते इसे पहचाना न जाए तो यह जोड़ों की समस्या हृदय रोग हार्मोनल असंतुलन और पाचन से जुड़ी परेशानियों को जन्म दे सकती है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सूजन क्या है। जब शरीर किसी चोट संक्रमण या अंदरूनी असंतुलन के खिलाफ प्रतिक्रिया करता है तो सूजन पैदा होती है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन जब यह लंबे समय तक बनी रहती है तो शरीर के लिए हानिकारक बन जाती है। लगातार बनी रहने वाली सूजन को क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कहा जाता है और यही कई गंभीर बीमारियों की जड़ मानी जाती है।
अब आइए उन सात प्रकार के दर्द को विस्तार से समझें जो शरीर में बढ़ती सूजन की ओर इशारा कर सकते हैं।
जोड़ों में लगातार दर्द

अगर सुबह उठते समय या लंबे समय तक बैठने के बाद घुटनों कोहनी कलाई या उंगलियों में जकड़न महसूस हो तो इसे सामान्य थकान मानकर अनदेखा न करें। जोड़ों में सूजन होने पर दर्द के साथ हल्की सूजन गर्माहट या अकड़न भी महसूस हो सकती है। कई महिलाएं इसे उम्र से जोड़ देती हैं जबकि यह शरीर में बढ़ रही सूजन का संकेत हो सकता है।
जोड़ों में लगातार सूजन रहने से आर्थराइटिस जैसी स्थिति विकसित हो सकती है। यदि दर्द कई हफ्तों तक बना रहे तो जांच कराना जरूरी है।
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मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द

बिना अधिक मेहनत किए भी यदि शरीर में भारीपन और मांसपेशियों में दर्द बना रहे तो यह भी सूजन का संकेत हो सकता है। जब शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ता है तो मांसपेशियों में सूक्ष्म स्तर पर सूजन पैदा होती है जिससे दर्द और थकान महसूस होती है।
कई बार महिलाएं इसे काम की थकान समझती हैं लेकिन यदि पर्याप्त आराम के बाद भी राहत न मिले तो यह शरीर का संकेत हो सकता है।
सिरदर्द और माइग्रेन

बार बार होने वाला सिरदर्द केवल तनाव का परिणाम नहीं होता। शरीर में सूजन बढ़ने से रक्त वाहिकाओं पर प्रभाव पड़ता है जिससे सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है। कुछ शोध बताते हैं कि माइग्रेन और क्रॉनिक इंफ्लेमेशन के बीच गहरा संबंध हो सकता है।
यदि सिरदर्द के साथ थकान चिड़चिड़ापन या आंखों में भारीपन भी हो तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
पेट दर्द और सूजन

पाचन तंत्र शरीर का केंद्र माना जाता है। जब आंतों में सूजन बढ़ती है तो पेट दर्द गैस फुलावट और अपच जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यह स्थिति लंबे समय तक रहने पर इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या अन्य पाचन विकारों का रूप ले सकती है।
बार बार पेट में दर्द होना शरीर का संकेत हो सकता है कि खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत है।
कमर और पीठ में दर्द

कमर दर्द को अक्सर बैठने की गलत मुद्रा या काम का दबाव समझा जाता है। लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द शरीर में सूजन का संकेत भी हो सकता है। खासकर यदि यह दर्द आराम के बाद भी कम न हो तो इसे हल्के में न लें।
सूजन से नसों और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है जिससे पीठ दर्द की समस्या बढ़ जाती है।
सीने में हल्का दर्द या भारीपन

हालांकि हर सीने का दर्द हृदय से जुड़ा नहीं होता लेकिन यदि सीने में बार बार भारीपन या असहजता महसूस हो तो इसे अनदेखा न करें। शरीर में बढ़ती सूजन हृदय की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है।
यदि इसके साथ सांस फूलना या अत्यधिक थकान भी हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
त्वचा में दर्द या संवेदनशीलता

त्वचा का लाल होना छूने पर दर्द होना या बार बार रैशेस निकलना भी सूजन का संकेत हो सकता है। शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ने पर त्वचा सबसे पहले प्रतिक्रिया देती है।
कई बार यह एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है जबकि असली कारण अंदर छिपा होता है।
महिलाओं में सूजन क्यों बढ़ती है
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव सूजन को प्रभावित करते हैं। मासिक धर्म गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान शरीर में कई परिवर्तन होते हैं। इसके अलावा तनाव नींद की कमी गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी सूजन बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
ज्यादा प्रोसेस्ड फूड शक्कर और तले हुए भोजन का सेवन शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकता है। वहीं पर्याप्त पानी न पीना और लगातार मानसिक तनाव भी इसे बढ़ाते हैं।
सूजन कम करने के लिए क्या करें
सबसे पहले संतुलित आहार अपनाएं जिसमें हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों। ओमेगा थ्री से भरपूर भोजन जैसे अखरोट और अलसी के बीज सूजन कम करने में मदद करते हैं।
नियमित हल्का व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाता है और सूजन कम करने में सहायक होता है। योग और ध्यान तनाव कम करके शरीर को संतुलित रखते हैं।
पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि नींद के दौरान शरीर खुद को ठीक करता है।
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डॉक्टर से कब मिलें
यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या दिनचर्या को प्रभावित करने लगे तो स्वयं उपचार करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। ब्लड टेस्ट और अन्य जांच से सूजन के स्तर का पता लगाया जा सकता है।
निष्कर्ष
शरीर हमेशा संकेत देता है बस हमें उन्हें समझने की जरूरत होती है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपने शरीर के छोटे बदलावों को नजरअंदाज न करें। जोड़ों का दर्द मांसपेशियों की जकड़न सिरदर्द पेट दर्द या कमर दर्द यदि बार बार हो रहा है तो यह शरीर में बढ़ती सूजन की चेतावनी हो सकती है।
समय पर पहचान और सही जीवनशैली अपनाकर सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ शरीर ही संतुलित और खुशहाल जीवन की नींव है।
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